कल तक नासमझ थे आज समझाते हैं लोग ,
बहुत अज़ीज़ बनकर ज़िन्दगी में आते हैं लोग |
कल तक हमदर्दी थी जिनको ग़मों से मेरे ,
आज मुझको मिलने से नज़रें चुराते हैं लोग |
बहुत अज़ीज़ बनकर ज़िन्दगी में आते हैं लोग |
कल तक हमदर्दी थी जिनको ग़मों से मेरे ,
आज मुझको मिलने से नज़रें चुराते हैं लोग |
Nice
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंThis is true expression of the strange ways of life and changing attitudes of the so called well wishers around us.
हटाएंWell said.